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भारत में यौन शिक्षा की नई पहल: स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होंगे 'सहमति' और 'स्वास्थ्य' के पाठ

भारत में यौन शिक्षा को लेकर नई पहल, स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होंगे सहमति और स्वास्थ्य के पाठ। जानें क्या बदलेगा। Think India News की विस्तृत रिपो...

ByThinkIndia Global Bureau
Published On Aug 12, 2026
भारत में यौन शिक्षा की नई पहल: स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होंगे 'सहमति' और 'स्वास्थ्य' के पाठ
Representative Image [ThinkIndia Global]

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026 (Think India News): केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने लंबे समय से लंबित यौन शिक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) में 'स्वास्थ्य और सशक्तिकरण' नामक एक नया मॉड्यूल शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इस मॉड्यूल के तहत कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को उम्र के अनुरूप यौन और प्रजनन स्वास्थ्य, सहमति की संस्कृति, यौन उत्पीड़न से बचाव और भावनात्मक सेहत जैसे विषय पढ़ाए जाएँगे। यह निर्णय भारतीय समाज में बदलते यौन परिदृश्य और किशोरों के सामने आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

विस्तृत जानकारी:
प्रस्तावित मॉड्यूल को तीन चरणों में विभाजित किया गया है—कक्षा 8-9 के लिए 'शारीरिक बदलाव और स्वच्छता', कक्षा 10-11 के लिए 'सहमति, संबंध और सुरक्षा', और कक्षा 12 के लिए 'यौन स्वास्थ्य और जिम्मेदार वयस्कता'। पाठ्यक्रम को विशेषज्ञों की एक समिति ने तैयार किया है जिसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद और अभिभावक शामिल थे। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने Think India News को बताया, "हमारा लक्ष्य यौन शिक्षा को वर्जना से निकालकर विज्ञान और मानवीय मूल्यों पर आधारित करना है। हर बच्चे को अपने शरीर और भावनाओं को समझने का अधिकार है।"

समाज की प्रतिक्रिया:
जहाँ शहरी अभिभावकों और प्रगतिशील स्कूलों ने इस कदम का स्वागत किया है, वहीं कुछ धार्मिक और रूढ़िवादी संगठनों ने इसे "भारतीय संस्कृति पर हमला" बताया है। हालाँकि, नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 73% भारतीय माता-पिता चाहते हैं कि स्कूलों में उम्र के अनुरूप यौन शिक्षा दी जाए। इस रिपोर्ट ने सरकार के निर्णय को मजबूत आधार दिया है।

भविष्य की राह:
यह मॉड्यूल अगले शैक्षणिक सत्र से केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में शुरू किया जाएगा, जिसके बाद राज्य सरकारों को भी इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से किशोर गर्भावस्था, यौन अपराध और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आएगी।

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