सच्चे प्रेम की अनूठी मिसाल: समाज और जाति की दीवारों से लड़ते रूपेश और स्नेहा, क्या मिलेगा न्याय?
गढ़वा के रूपेश और स्नेहा की कहानी जो 4 साल के गहरे प्यार और समाज की कड़वी सच्चाइयों को बयां करती है।
ByThinkIndia Global Bureau
Published On Jun 14, 2026

Representative Image [ThinkIndia Global]
गढ़वा के रमना से एक दिल झकझोर देने वाली कहानी लगातार समाज से सवाल पूछ रही है। रूपेश और स्नेहा का 4 साल का प्रेम, जो सिर्फ जातिवाद की भेंट चढ़ता दिख रहा है। एक्सीडेंट के बाद भी रूपेश का संघर्ष और स्नेहा का 16 सोमवार का व्रत क्या समाज की पत्थरदिल सोच को बदल पाएगा? आज का युवा वर्ग भी पूछ रहा है कि क्या प्रेम और समर्पण की समाज में कोई जगह नहीं है? माता-पिता की झूठी शान के आगे क्या एक बेटी की खुशियों का यूं ही गला घोंटा जाता रहेगा?
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