ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैला आक्रोश, पंचायतों में पारित हुए निंदा प्रस्ताव
यह आंदोलन अब सिर्फ रांची या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। खूंटी...
ByThinkIndia.press Bureau
Published On 12 अग॰ 2026
Representative Image [ThinkIndia.press Bureau]
यह आंदोलन अब सिर्फ रांची या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। खूंटी, गुमला, सिमडेगा और दुमका जैसे आदिवासी बहुल जिलों की कई ग्राम पंचायतों ने बैठक कर परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ बाकायदा निंदा प्रस्ताव पारित किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चों ने अपनी जमीन और मवेशी बेचकर कोचिंग की फीस भरी थी, लेकिन इस भ्रष्टाचार ने गरीब आदिवासियों और मूलवासियों के बच्चों के सुनहरे भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है।
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