मैरिटल रेप अपराधीकरण पर ऐतिहासिक फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'विवाह सहमति की अंतिम मोहर नहीं'
सुप्रीम कोर्ट का मैरिटल रेप पर ऐतिहासिक फैसला, 'विवाह सहमति की अंतिम मोहर नहीं'। जानें फैसले की पूरी डिटेल और समाज पर असर। Think India News की एक्स...
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 (Think India News): देश की सर्वोच्च अदालत ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पाँच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद खंड को रद्द करते हुए कहा कि "विवाह पति को अपनी पत्नी के शरीर पर बिना शर्त अधिकार नहीं देता। सहमति हर यौन संबंध की आधारशिला है, चाहे वह विवाह के भीतर ही क्यों न हो।"
फैसले के मुख्य बिंदु:
अदालत ने अपने 456 पन्नों के ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि एक महिला का अपने शरीर पर अधिकार विवाह के बाद भी बरकरार रहता है। न्यायमूर्तियों ने कहा कि यह अपवाद संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का उल्लंघन करता था। फैसले में यह भी निर्देश दिया गया कि सरकार इस नए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रशिक्षण, हेल्पलाइन और फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था करे।
देशभर में प्रतिक्रिया:
महिला अधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे "आधी आबादी के लिए स्वतंत्रता दिवस" करार दिया। वहीं, कुछ पुरुष अधिकार संगठनों और धार्मिक नेताओं ने इसे परिवार व्यवस्था के लिए खतरा बताया। सोशल मीडिया पर #MaritalRapeVerdict पूरे दिन ट्रेंड करता रहा, जिसमें युवाओं ने बड़ी संख्या में समर्थन जताया।
क्या बदलेगा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब पत्नी अपने पति के खिलाफ बिना किसी अतिरिक्त शर्त के बलात्कार का मामला दर्ज करा सकेगी। हालाँकि, सहमति का अभाव साबित करना एक चुनौती बना रहेगा, इसलिए अदालत ने सबूतों के मानकों को लचीला बनाने की सिफारिश की है।

